INDEPENDENCE DAY

INDEPENDENCE DAY - Collection of Hindi Poems

INDEPENDENCE DAY – Collection of Hindi Poems

Collection of Hindi Poems – INDEPENDENCE DAY( स्वतंत्रता दिवस )

1.रात के  अंधियारे  में ,

जब  तक रुतबा  रहेगा  चाँद  का ,

कारगिल  की  चोटियों  पर ,

तब  तक  फैरता  रहेगा  तिरंगा  शान  का .

धरती  क्या  आसमान  में ,

डंका  बजेगा  हिंदुस्तान  नाम  का ….

 

2.गली  गली   में  तूफ़ान  है ,

आबो  हवा  में  खुसबू  है एक पहचान  की ,

जब  तक  सांस रहेगी  मुझमे ,

तब  तक  रक्षा  करूँगा  हिंदुस्तान  की ..

 

3.हार  के  बाद  जीत ,

खेल  का  अगला  चरम  है ,

सदा  फैरता  रहे  छोटी  पे

तिरंगा  यही  हमारा  प्रण है ,

न  हिन्दू  न  मुसलमान ,

इंसानियत   ही   सबसे  बड़ा  कर्म  है  ,

अरे  यारो  का  मुल्क  से  भी  बड़ा ,

कोई  धर्म है …..

 

INDEPENDENCE DAY( स्वतंत्रता दिवस )

लाल  रक्त  से  धरा  नहाई,

श्वेत  नभ  पर  लालिमा  छायी  ,

आजादी  के  नव  उद्घोष  पे ,

सबने  वीरो  की   गाथा  गायी ,

गाँधी ,नेहरु ,पटेल , सुभाष   की ,

ध्वनि  चारो  और   है  छायी ,

भगत , राजगुरु  और , सुखदेव  की

क़ुरबानी  से   आँखे   भर  आई ||

ऐ  भारत  माता  तुझसे  अनोखी ,

और  अद्भुत  माँ  न   हमने  पायी ,

हमारे   रगों  में  तेरे  क़र्ज़  की ,

एक  एक  बूँद  समायी .

माथे  पर  है     बांधे    कफ़न ,

और  तेरी  रक्षा  की  कसम  है  खायी ,

सरहद  पे  खड़े  रहकर ,

आजादी  की  रीत  निभाई ,

 

आजादी 

ये  कैसी  आज़ादी  है ,

हर  तरफ  बर्बादी  है ,

कही  दंगे  तो  कही  फसाद  है ,

कही  जात  पात  तो  कही ,

छुवा  छूत   की   बीमारी  है |

हर  जगह  नफरत   ही  नफरत ,

तो  कही  दहशत   के  अंगारे  है

क्या  नेता  क्या  वर्दी  वाले  ,

सभी  इसके  भागीदारी  है .

 

हम  तो  आज़ाद  हुए  लड़कर  पर ,

आज़ादी  के  बाद   भी  लड़  रहे  है ,

पहले  अंग्रेजो  से   लड़े  थे

अब  अपनों  से  लड़  रहे  है ,

आज़ादी  से  पहले  कितने ,

ख्वाब  आँखों  में  संजो   रखे  थे ,

अब  आजादी  के  बाद  वो ,

ख्वाब  ,ख्वाब  ही  रह  गए   है ,

अब  तो  अंग्रेज़ी  राज  और ,

इस  राज  में  फर्क  न  लगे ,

पहले  की  वह   बद   स्थिति

अब  बदतर  हो  गई  है ..

 

ये  कविता  हर  देशवासियों  तथा  मुख्य  रूप  से  उन्हें  समर्पित  है  जिन्होंने  26/11 को  हुए  आतंकी  हमले  को  सेहन  किया  | ये  कविता  हर  उस  शहीद   के  लिए  है  जिसने  आतंकियों  का   डट  कर  मुकाबला  किया

और  होंगे  धमाके ,और  फटेंगे  बम .

पर  हमारे  अन्दर  का  जोश  कभी  न  होगा  कम

हर  मुस्किल  परिस्थिति  में ,एक  रहेंगे  हम ,

पुरे  विश्व  में  कायर  नहीं  ,वीर  कहलायेंगे  हम ,

जी  तोड़  महनत  कर  लो ,पर  कभी   न  डरेंगे  हम ,

दामिनी  सा  गर्जायेंगे  किसी  भी  मौसम  में  हम ,

ये  धरा  हमारी  माता  है ,इसके  लाल  हम ,

इस  पर  वार  करने  वाला  हर  निशाचर  होगा  ध्वं .

देवो  की  इस  धरती  पे , एक  न   बचेगा  दशानन ,

खडग  उठाये  हम  खड़े ,आतंकियों  का  होगा  अंत

ऐ  शहीदों   तुम्हारे  बलिदानों  को

याद  रखेंगे   हम  ,

तुम्हारी  ही  तरह  इस  देश  के , वीर  कहलायेंगे  हम

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