Meri Rachanaayen

Excerpt: First poem emphasizes on the beauty of the nature. It tell us to live every moment of our lives and live to our fullest potential. Second poem is about the past memories which the girl wants to forget but is unable to. (Reads: 54)

 

” कभी जो तूने “

“कभी देखा है तूने खुले आसमां
के तले बाँहे फैला के अपनी ,
वो नशा आसमान का जो तुम्हे चूम लेता ।
कभी देखा है तूने सोती रातो मे वो
भीगे चाँद के तले , तारों की छावं मे ,
फर्श पे पड़े हुए आँखे मूँद कर ,
उसकी शीतलता मे जो तुम नहाये होते ।
कभी देखा है तूने उन समुन्दर की लहरो पे ,
किरणों को अठखेलियां करते जो
तुझे छू कर निकल जातीं ।
बिखरी हवाओं मे खुश्बू फिज़ाओं की,
महसूस की है तूने कभी ,
जो तुझे अपने स्पर्श से गुदगुदा जाती ।
कभी बहते हुए झरनों के शोर को ,
तू ख़ामोशी से सुन ,
गुनगुनाते अहसास से ,
जो तेरा तन-मन जरा भीग जाये ।
कभी देखा है तूने बादल से ,
बारिश की बूंद का इठला के,
निकलना धरती मे समाना ,
वो माटी की सोंधी महक जो ,
तेरे मन को सुगंधित कर जाये ।
नहीं देखा इन्हे , तो तूने क्या देखा ?
ये जीवन के झमेले तो हैं बहुत से ,
भूलकर सब कुछ थोड़ी देर ही सही ,
छुपा है जिंदगी का राज जिनमें ,
कभी इन लम्हों को तू जी भर जीके तो देख ।।”

 

” बोलती ख़ामोशी “

“वो तेरी खामोश निगाहें ,
तू चाहे कुछ कहे न कहे ,
पर तेरी खामोश निग़ाहों से ,
सब बयाँ हो जाता है ।
दर्द जो इतना सीने मे ,
छुपाये रहते हो ।
मुस्कुराकर क्यूँ ग़मों को ,
यूँ ही पीये जाते हो ।
छलक जाने दो आज ,
इस दर्द को इन निग़ाहों से ,
बह जाने दो आँसुओं के ,
सैलाब को रोको न इन्हे आज तुम ।
भूलकर अपने माजी (अतीत ) को ,
किनारे पे तो आना होगा ।
लौट कर तो देख ,
इक मौका तो दे तू मुझे ,
तेरे दामन को थामने का ।
बस इक इशारा भर कर दे तू मुझे ,
तेरे हर ग़मो की धूप को ,
छांव मे बदल दूंगा मैं ।
तुझको तुझसे खुद मे छुपा लूंगा मैं ।।”

मेरी कलम से……..

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