My Friend..

मेरी दोस्ती –  मेरा प्यार !  …   !!   …   !!! – My Friend..( This Hindi story is about two friends and their friendship. One friend is an ordinary person while the other is now a minister but their feeling remains same)

shake-hands

Friends Short Story – My Friend..
Photo credit: octaviolopez from morguefile.com

रामखेलावन के पास धैर्य नाम की कोई चीज नहीं है. बडबड़ाता रहा, ‘ मंत्री जी का दर्शन करवा दीजिये ’. मैंने उसके लिए जमीन – आसमान एक कर दिया और आखिरकार उपाय निकाल ही लिया. उसे लेकर मंत्री – आवास समय पर पहुँच गया. उसके चेहरे की ओर दृष्टी डाली तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं था . प्रतीत हो रहा था कि जैसे उसे कारू का खजाना मिलनेवाला है इस दर्शन से . शुबह से दोपहर होते ही रामखेलावन अपने मन की बेचैनी छुपा न सका , बोला ,’ हुजूर बैठे – बैठे पाँव भारी हो गया . और कबतक इन्तजार करना पड़ेगा , हुजूर !

तबतक जबतक वे बाहर निकल कर नहीं आते.

तभी एक सेकुरेटी गार्ड बाहर निकला . रामखेलावन लपक लिया उसको और पूछ बैठा , ‘ बड़े साहब कब दर्शन देंगे ’?

नहीं जानते , आज छुट्टी का दिन है ऐसा सवाल तुमको पूछने का अधिकार किसने दिया ? मंत्री जी हैं . उनको असीमित शक्ति प्रदान की गयी है. वे अपने मन के मुताबिक काम कर सकते हैं.

रामखेलावन का धैर्य का बाँध टूटा जा रहा था . मैंने समझाया , ’ देखो , राम खेलावन ! इतना हडबड़ाने से काम नहीं चलेगा. आखिर मंत्री है न ! कोई नथ्थू – खैरु तो है नहीं . उनका वक़्त कीमती है, जब वक़्त मिलेगा तब न हमसे मिल पाएंगे. हजारों तरह के काम रहते हैं उनके पास. ऊपर से विपक्ष की मार अलग से. अच्छा काम करो तो भी नाखुश और बूरे काम ( यद्यपि कोई काम बूरा नहीं होता , बूरे तो हम होते हैं ) , उसका तो वो नतीजा होता है कि विपक्ष महीनों तक सदन / विधान सभा की कारवाही चलने ही नहीं देते हफ़्तों , महीनों भर. तोड़- फोड़ , गाली – ग्लोज , उठा – पटक – होता है सो अलग . उस वक़्त शर्म से सर झुक जाता है हमारा जब इस दृश्य को देखकर लड़के – बच्चे पूछ बैठते हैं, ‘ ई सब कोन आदमी हैं , बाबू जी , जो इस प्रकार लड़ता – झगड़ता है आपस में ? हम निरुत्तर हो जाते हैं तब . शर्म से सर झुक जाता है हमारा .

देखा रामखेलावन आव देखा न ताव गेट के अन्दर घूस गया. बैठक खाने में भी चला गया. गार्ड ने देख लिया था . देखा- देखी पाप और देखा – देखी पुण्य यह हमारे रग – रग में समाया हुआ है , अब भी इससे हम बंधे हुए है. सेकड़ों लोगो की भीड़ जमा हो गयी गेट पर . गार्ड दनदनाता हुआ आ धमका और गरज कर पुलिसिया जुबान में बोला, ‘ ए ! पहलवान भाई ! कुरता – धोतीवाले ! बाहर निकलिए , कहाँ घुसे जा रहें हैं ? इधर तशरीफ़ लाईये. गठरिया मा का बा ? बड़ा फुलल –फुलल लागत बा ? कहीं बम वोम तो नहीं है ? जमाना बड़ा ख़राब बा, गठरी चेक कराओ पहले तब अन्दर जाने को .

रामखेलावन ने सगर्व कहा , ‘ देखिये सिपाही जी हमलोग कोई चोर – उचक्के नहीं हैं . देहाती जरूर हैं लेकिन अच्छे खानदान से ताल्लुक रखते हैं . ‘ ई लोटा बा, पानी पिए के खातिर, ई थाली बा , खाए खातिर, ई पोटेलिया मा सत्तू बा ! मंत्री जी के खातिर , मलकिनी बाँध देल्थिन , कहलथिन कि मंत्री बबुआ के सत्तू बहूत पसंद बा. उनका दे दिहु.

तुम्हारा दिमाग ख़राब है क्या ? मंत्री जी सत्तू खायेंगे क्या ? पता नहीं मंत्री जी चीकेन बिरयानी खाते हैं . चीकेन दो प्याजा , चीकेन बटर मसाला खाते हैं . कहाँ – कहाँ से चले आते हैं लोग ! हम मालिक जी लिए सरैसा की खैनी भी ….

चलो दूर हटो , ट्रेफिक जाम मत करो . मंत्री जी आ रहें हैं .

मैं ढीट की तरह वहीं डटा रहा , टस से मस नहीं हुआ. मंत्री जी की नजर मुझ पर पड़ गयी . फिर क्या था , गले से लिपट गये और हाथ पकड़कर अन्दर ले गये . भौजी से बोले , देखो ! रामखेलावन आया है , जरा सा भी नहीं बदला है . वही कद-काठी , वही बांकपन , सहज – सरल बात – चीत के लहजे ….. लक्ष्मी ! आज मेरा दिन इसी के साथ गुजरेगा . महादेव को बोल दो . आज का सारा कार्यक्रम स्थगित . सर ! गुरूजी बाहर हैं . उन्हें बुला लिया जाय .

गार्ड ने आवाज लगाई , ‘ कोई कैलाश बाबु हैं क्या ? मंत्री जी अन्दर बुला रहे हैं .

मुझे तो यकीं ही नहीं हो रहा था . रामखेलावन भी मुझसे कुछ नहीं बताया था कि मंत्री जी उसका लंगोटिया यार है. भीतर से बैठक खाने तक मंत्री जी मुझे रिसीव करने आ गये. मैं तो हका- बक्का रह गया . सादर बैठाये , हाल चाल अपनों जैसा पूछे . मैं गदगद हो गया आवोभगत से .

मंत्री जी पूछ बैठे , ‘ रामखेलावन ! भौजी , सत्तू भेजी होगी, दो , आज लिट्टी चोखा खायेंगे . घर का चना – चक्की में पीसा हुआ – क्या सौंधी – सौंधी खुशबू ! पुराने दिन ख्याल आ जाते हैं जब हम दोनों भौजी के हाथ से लिट्टी – चोखा जिद करके बनवाते थे और चटकारे मार – मार कर खाते थे.

झट मेरी तरफ मुखातिब हुए और बोले , “ आप के बारे मुझे रमुआ बराबर बोला करता है. ’ आज का दिन मेरे साथ बीतेगा आपका . इसे अपना घर ही समझिये .

यह तो मेरा अहोभाग्य है कि … आप के बारे बहुत सुना था , लेकिन आज देखा जैसा बताया मुझे उससे बढ़कर पाया गुण आपमें .

गुजरे वक़्त की खूब बातें हुयी हम सब में . तबतक भौजी लिट्टी – चोखा भी ले आयी. हम जी भर के खाए – पीये.

जब जाने को तैयार हुए तो मंत्री जी पूछ बैठे, “ सरैसा का खैनी कहाँ ? ’

वो भी लाया हूँ , लीजिये , पावभर है आपके लिए.

मंत्री जी पोटली को ऐसे झटपट छीन लिए जैसे कृष्ण जी ने सुदामा की चावल की पोटली झपटकर छीन ली थी.

हम इस प्रेम व स्नेह को देखकर इतने भावविहव्ल हो गये कि मेरी सुध –बुध जाती रही.

हमें स्टेसन तक अपनी गाडी से भेज दिए . देखा गला मिलते वक़्त दोनों लंगोटिए यार की आखें डबडबा गईं.

और ? और एक मैं था जो अपनी आंसुओं को तो पी गया , लेकिन चेहरे के प्रतिविम्वित भाव को नहीं छुपा सका .

रामखेलावन पूछ बैठा , ‘ हुजूर ! आप क्यों रो रहें हैं ?

काश ! मेरे पास इस सवाल का जवाब होता !

हम ट्रेन में सवार हो गये तो माधव , उनका निजी सचिव हमारे समीप दो बड़े – बड़े पैकेट लेकर आया और हमें थमाते हुए बोला ,’ दुर्गा पूजा का समय है न ! साहेब ने कैलाश जी के लिए सफारी सूट के कपडे , अपने बूजम फ्रेंड के लिए एक जोड़ी धोती – कुरता और इस पाकेट में क्या है, मैं नहीं जानता , आप ही खोलकर देख लीजयेगा. ये कुछ पैसे हैं , बाल – बच्चों के लिए .

इसकी क्या जरूरत थी ? रामखेलावन ने कहा .

ले लीजिये , नहीं तो मुझे डांट पड़ेगी .

हमें वो सम्मान व ईज्जत मिली जिसे हम भुला नहीं सकते .

हमारे नेत्रों में जो अश्रू – बूँद सुखकर अटके पड़े थे , वे भी द्रवित होने के लिए बेचैन थे .

जब हम चौपाल में पहुंचे तो उस पैकट को खोला तो देखा एक आसमानी रंग की बनारसी साड़ी है और मंत्री जी ने खुद अपने हाथों से पैकेट के ऊपर लिखा है , ” सादर व सप्रेम भौजी के लिए ” _– बैजू .

***

लेखक : दुर्गा प्रसाद |

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One thought on “My Friend..

  1. कहानी अच्छी थी पर. मोर्डेन कृष्णा और सुदामा की पर राम खिलावन के आने का कारण सपष्ट नहीं हुआ कुछ जल्द बाजी में लिखी गयी है. थोड़ी सी मेहनत की जरुरत और थी .

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