HRIDYA PARIVARTAN

Excerpt: The author not finding Gupta Ji went to his sweet shop. He wanted to offer his favourite betel, cigarette and bidi but he said he had already given up these (Reads: 194)

 

गुप्ता जी की युसूफ सराय में एक मिठाई की दूकान है | सच पूछिए तो जबतक गुप्ता जी दूकान पर बैठे रहते हैं तबतक इक्के – दुक्के ही ग्राहक कभी – कभार भूले भटके आ जाते हैं | इसकी वजह है | इनकी बीबी इनकी बुरी आदतों पर दिनभर लताडती रहती है और ये अपना गुसा बेवजह नौकरों और ग्राहकों पर निकालते हैं |

अब आप पूछेंगे कि कौन सी बुरी आदते हैं | कुछेक दिनों की जान – पहचान से जो मैंने जाना उसी के अनुसार बता सकता हूँ |

पान बीडी सिगरेट से इनकी यारी है | आदत से इतने मजबूर हैं कि बीबी के बिना जी सकते हैं , लेकिन इनके बिना नहीं | खाने – पीने के शौकीन | जो भी जंच गया , लपेट के साफ़ कर देते हैं | न तो मन पर और न तन पर इनका नियंत्रण है |
इन्हें बीमारियों की कोई परवाह नहीं | इनकी सोच अलग – थलग है | “ होईयें वही जो राम रूचि राखा ” पर यकीन करते हैं | जो भी खाए सो भी जाए जो न खाए वो भी जाए तो फिर बिन खाए क्यों पचताए !

पान में जर्दा डालकर खाते हैं – पीली पत्ती एवं काली पत्ती | चुभलाते हैं फिर पीक थूकने के लिए उपयुक्त जगह की तलाश करते हैं | इधर – उधर नज़र दौडाते हैं और मौका देखकर कहीं भी थूक देते हैं | न संकोच न ही भय |
सिगरेट चाय की चुस्की लेने के बाद बड़े ही इत्मीनान से जलाते हैं और अपनी जिंदगी को तो धुएँ में उड़ाते ही हैं आस – पास के लोगों को भी नहीं बख्शते |

बीडी मजबूरी में एकाध जब पाकिट में छुट्टे नहीं होते पानवाले से मांगकर पीने में गुरेज नहीं करते | सिगरेट तो उँगलियों के बीच में पर बीडी को मुठी के बीच रखकर नबाव की तरह पीते हैं |

इनको जो बीमारियाँ हैं ये मुस्कुराते हुए बताने में गर्व का अनुभव करते हैं | इन्हें रक्त – चाप , मधुमेह , गैस , कब्जियत , साँस – समस्या और हृदय रोग हैं | मोटापा तो वंशानुगत बीमारी है | पीढ़ियों से चली आ रही है |

सप्ताह भर से गुप्ता जी का दर्शन न होने पर मन में तरह – तरह के अशुभ शंकाएं अंकुरित होने लगी | शाम को बस स्टेंड न जाकर युसूफ सराय चल दीये | दूकान की दहलीज पर पाँव रखे ही थे कि उठकर स्वागत में खड़े हो गए और शुरू हो गए :

अहो भाग्य ! कि आप जैसे इंसान के पाँव इस चौखट पर पड़े , धन्य हो गया मैं | बैठिये |
नहीं बैठूँगा |
क्यों ? मुझसे कोई गलती हो गई क्या ?
हत्या !

किसकी ? सप्ताह भर से तो बाहर निकला ही नहीं तो कैसे हत्या और किसकी हत्या ?
दोस्ती की , मित्रता की , यारी की … सप्ताह भर मैं बस स्टेंड नित्य जाता रहा और इन्तजार करता रहा , पर न तो कोई घबर न ही कोई चिठ्ठी – पत्री , मिसकोल तो मार ही सकते थे , क्यों आपने मेरे अरमानों की हत्या कर दी ?
आप के लिए दो पुडिया पान बंधवा के लाया हूँ , एक पाकिट विल्स फ़िल्टर और एक गट्टा बीडी | दिनभर शौक से पीजिए |
मैंने सप्ताह भर पहले ही इन नशीली जानलेवा चीजों से तौबा कर ली |

ई सब अचानक कैसे ?

उसी दिन से जिस दिन मैडम ने चोर – उचक्कों को जीवन मूल्य व आदर्श की सीख दी | चोरी – छीनतई छोडवा दी |
मैं भी उनके विचारों से इस कदर प्रभावित हुआ कि मैंने दूसरे दिन से ही अपनी जीवन शैली और रोजमर्रे की जिंदगी में सद्विचारों , सद्गुणों व सद्कर्मों को उतारना प्रारंभ कर दिया | अब अपना समय सार्थक कार्यों में ही व्यय होता है |

दूकान वक्त पर नित्य आता हूँ | मंगलवार को साप्ताहिक अवकाश रख दी है | सामानों की गुणवता पर अपना ध्यान केंद्रित कर दिया है | ग्राहकों के साथ सद्व्यवहार के साथ उनकी सुख – सुविधा पर ख्याल रखा जाता है |
ग्राहकों की संख्या में उतरोत्तर वृद्धि हो रही है , साथ ही साथ आय में भी |

इसका मतलब मैडम की बातों से आपका हृदय – परिवर्तन हो गया |

हृदय – परिवर्त ही नहीं अपितु कायाकल्प !

अब सब कुछ रूटीन से होता है | सुबह में मोर्निंग वाक पर निकल जाता हूँ – पति – पत्नी दोनों | अब गालियों की जगह प्यार व मोहब्बत … मीठी – मीठी चपत से सदा – सर्वदा के लिए मुक्ति – छुटकारा |
दिनभर नियमित काम और रात में चैन की नींद !

“हेल्थ इज वेल्थ” के सिद्धांत को तन , मन व जीवन में उतार रहा हूँ |

वो आप क्या कहते हैं जब मूडीएल हो जाते हैं ?

आनंद ही आनंद !

वही आनंद ही आनंद |

हरिया ! साहब के लिए दो कलाकंद और एक समोसा लेते आओ |

इसकी क्या जरूरत थी ?

टेस्ट करके तो देखिये , लाहोरी मिठाई वाले से बीस ही होगा |

सचमुच में बहुत प्योर व टेस्टी |

आप रोज शाम को यहीं आया कीजिये | आपकी शिकायत करने में मुझे बड़ा मजा मिलता है |

मुझे भी , जब कोई मेरी आलोचना करते हैं |

अब मैं … |

फिर इसी दिन इसी वक्त पर …|

हरिया ! साहब को बाईक से छोड़ दो इनके घर तक |

मैं तो चला आया लेकिन जो देखकर , सुनकर आनंद की अनुभूति हुई वह कल्पनातीत है |

लेखक : दुर्गा प्रसाद | २४ नवंबर २०१६ | वृस्पतिवार |

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